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गरीबों पर सख्ती, रसूखदारों पर खामोशी! अफरीद पंचायत में बेजाकब्जा पर उठे सवाल*

ओपी राठौर/अफरीद। बम्हनीडीह विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अफरीद में बेजाकब्जा हटाने की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वन विभाग द्वारा आश्रित ग्राम मुड़पार के कई परिवारों को भूमि खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद ग्रामीण प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर वर्षों से सरकारी जमीन पर छोटे-छोटे मकान बनाकर रहने वाले गरीब परिवारों को बेघर करने की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत क्षेत्र के कई स्थानों पर सरकारी भूमि पर बने पक्के मकान, दुकानें और बड़े कब्जे प्रशासन की नजरों से ओझल बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन पर कब्जा हटाना ही उद्देश्य है, तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। लोगों का कटाक्ष है कि “प्रशासन का बुलडोजर क्या केवल कमजोरों के घर का रास्ता जानता है, या फिर बड़े कब्जाधारियों तक पहुंचने का नक्शा अभी तैयार नहीं हुआ है?”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बीते कई वर्षों में पंचायत क्षेत्र में सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जे हुए, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों के मन में यह धारणा बन रही है कि नियम-कायदे केवल गरीबों के लिए ही बनाए गए हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि किसी भी परिवार को बेघर करने से पहले पंचायत क्षेत्र में हुए सभी बेजाकब्जों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए तथा छोटे और बड़े सभी कब्जाधारियों पर समान रूप से कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि न्याय तभी माना जाएगा, जब कानून की नजर में सभी बराबर हों।

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