सारागांव में सवाल, चांपा में सन्नाटा! सीनियर लाइनमैन की डिग्री पर RTI का जवाब बना ‘निजी मामला’

ओपी राठौर/ सारागांव../..बिजली विभाग कार्यालय सारागांव में पदस्थ एक सीनियर लाइनमैन की शैक्षणिक योग्यता और प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर क्षेत्रीय पत्रकार द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
पत्रकार ने पारदर्शिता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 5 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, प्रमोशन आदेश की प्रति, चयन प्रक्रिया की नियमावली सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे।
लेकिन जनसूचना अधिकारी संभागीय कार्यालय चांपा ने चौंकाने वाला कदम उठाते हुए 4 बिंदुओं की जानकारी देने से पहले संबंधित सीनियर लाइनमैन की सहमति लेने की बात कही। विभाग के अनुसार, संबंधित कर्मचारी ने अब तक जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं दी है। वहीं पांचवें बिंदु की जानकारी के लिए मामला बिलासपुर कार्यालय भेज दिया गया है।
कानून क्या कहता है?
RTI की धारा 11 तीसरे पक्ष से जुड़ी जानकारी में केवल आपत्ति मांगने की प्रक्रिया है, न कि जानकारी रोकने का सीधा अधिकार।
वहीं धारा 8(1) में स्पष्ट है कि सिर्फ संवेदनशील और निजी मामलों को ही रोका जा सकता है—सरकारी कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता और प्रमोशन आदेश इसमें शामिल नहीं होते।
* फर्जीवाड़े की आशंका ने बढ़ाई चिंता*
क्षेत्र में चर्चा है कि कई मामलों में फर्जी मार्कशीट और संदिग्ध डिग्रियों के आधार पर नौकरी और प्रमोशन तक हासिल किए गए हैं। ऐसे में जब प्रमाणिकता जांचने के लिए जानकारी मांगी जा रही है, तो विभाग का टालमटोल रवैया संदेह को और गहरा कर रहा है।
*पारदर्शिता पर बड़ा सवाल*
*एक ओर जहां आम लोग* *अपनी डिग्रियों को गर्व से घर की दीवारों पर* सजाते हैं, वहीं सरकारी विभाग इन जानकारियों को “निजी” बताकर छुपाने में लगे हैं। इससे साफ-सुथरी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।*
*अब होगी अपील और जांच की मांग*
आवेदक ने साफ कर दिया है कि यदि जानकारी नहीं दी गई, तो वे प्रथम अपील के साथ-साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
बिजली विभाग में यह मामला सिर्फ एक RTI तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्था की साख से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि विभाग सच्चाई सामने लाता है या “निजी मामला” कहकर इसे दबाने की कोशिश जारी रखता है।






