छत्तीसगढ़

जूनियर डॉक्टर से रेप और हत्या के विरोध में छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों का प्रदर्शन, कोरबा में इलाज के अभाव में महिला मरीज की मौत*

कोरबा। कोलकाता में एक जूनियर डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या के विरोध में छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस हड़ताल के कारण कोरबा मेडिकल कॉलेज में एक महिला मरीज की इलाज के अभाव में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, मरीज को भर्ती तो कर लिया गया था, लेकिन इलाज शुरू नहीं किया गया, जिसके कारण उसकी स्थिति बिगड़ती गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।

### सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की OPD सेवाएं ठप

इस विरोध प्रदर्शन के चलते छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाएं बंद हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस घटना के विरोध में एक दिन के लिए OPD सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं को इस हड़ताल से अलग रखा गया है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को इलाज मिल सके।

### एक दिन के लिए OPD सेवाएं बंद

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के निर्णय के अनुसार, 17 अगस्त शनिवार सुबह 6 बजे से लेकर रविवार सुबह 6 बजे तक अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ठप रहेंगी। इस दौरान जनरल चेक-अप और अन्य नियमित जांच के लिए आने वाले मरीजों का इलाज नहीं होगा। डॉक्टरों के इस हड़ताल का मुख्य उद्देश्य जूनियर डॉक्टर के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है।

### इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी

हालांकि, इस हड़ताल के दौरान इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बताया कि यह हड़ताल डॉक्टरों के प्रति हो रही हिंसा और असुरक्षा के खिलाफ है, और इसका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

### परिजनों का आक्रोश

कोरबा मेडिकल कॉलेज में महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है। उनका आरोप है कि हड़ताल के कारण उनकी प्रियजन को समय पर इलाज नहीं मिल पाया, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई।

इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में हड़ताल के कारण होने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वालों का कहना है कि डॉक्टरों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन आम नागरिकों का कहना है कि इस तरह की हड़ताल से मरीजों की जान को खतरा हो सकता है।

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