सुशासन तिहार के बीच लाखों का स्टेडियम ध्वस्त, , अब आशियानों पर खतरा; गरीबों को मिला नोटिस ग्राम पंचायत अफरीद में वन विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश


अफरीद। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन तिहार मनाकर जनता की समस्याओं को सुनने और समाधान का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बम्हनीडीह ब्लॉक के ग्राम पंचायत अफरीद-मुड़पार में ग्रामीण खुद को उपेक्षित और असहाय महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने गौचर भूमि को अपने कब्जे में लेकर पौधरोपण के नाम पर घेराबंदी कर दी है, जिससे गांव के बच्चों का खेल मैदान, पशुओं का चारागाह और भविष्य की सार्वजनिक सुविधाओं की संभावनाएं समाप्त होती नजर आ रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार जिस भूमि पर वर्षों से गांव के बच्चे खेलते थे और जहां लाखों रुपये की लागत से स्टेडियम का निर्माण कराया गया था, उसे भी ध्वस्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, मैदान के पीछे स्थित किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि तक पहुंचने के रास्ते को लेकर भी ग्रामीणों को लंबी जद्दोजहद करनी पड़ी। विरोध और निवेदन के बाद बमुश्किल आवागमन के लिए रास्ता छोड़ा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग का रवैया संवाद और सहमति के बजाय आदेश और कार्रवाई वाला दिखाई दे रहा है। उनका आरोप है कि फैसले सीधे थोपे जा रहे हैं, जबकि स्थानीय आवश्यकताओं, पशुओं के चारागाह, बच्चों के खेल मैदान और गांव के विकास की भावी जरूरतों पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।
वर्षों से मकान बना कर रह रहे ग्रामीणों को नोटिस 7 दिवस के भीतर जवाब पत्र प्रस्तुत करे नहीं तो तोड़ दिए जायेंगे मकान
सबसे अधिक नाराजगी उन परिवारों में है जिन्हें वर्षों से बसे अपने आशियानों को हटाने के लिए नोटिस थमाए गए हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सरकार वास्तव में सुशासन और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध है तो फिर गरीबों के घरों पर बुलडोजर जैसी कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर एकतरफा फैसले क्यों लिए जा रहे हैं?
ग्रामीण कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि आजादी के 79 वर्षों बाद भी गांवों में अंग्रेजी हुकूमत जैसी कार्यशैली देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि एक ओर प्रदेश में विकास परियोजनाओं और उद्योगों के लिए जंगलों की कटाई होती है, वहीं दूसरी ओर गांवों की गौचर भूमि पर पौधरोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए स्थानीय जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।





