28 में से 24 नए चेहरे…, जानिए राज्यसभा प्रत्याशियों के जरिए भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए दे रही क्या संदेश

27 फरवरी को होने वाले राज्यसभा चुनाव में भले ही ऊपरी सदन में भाजपा की सीटों की संख्या में बदलाव न हो, लेकिन इसका लुक बिल्कुल अलग होगा. पार्टी द्वारा घोषित 28 नामों में से – वर्तमान में इसके पास मौजूद सीटों की संख्या के समान – 24 नए हैं, केवल चार दोहराए गए हैं.
राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में अबकी बार कुल 56 सीटें खाली हो रही हैं. भाजपा ओडिशा में बीजद की मदद से अपनी सीटों की संख्या 28 तक ले जा सकती है. राज्यसभा में लौटने के लिए तैयार चार भाजपा नेताओं में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा (गुजरात से नामित), वरिष्ठ मंत्री अश्विनी वैष्णव (ओडिशा से नामित), केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन (मध्य प्रदेश से पुनः मनोनीत) और भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी (उत्तर प्रदेश से नामित) के नाम की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी.
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह ऐसे वरिष्ठ नामों को लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहती है, जो राज्यसभा में कई बार सेवा कर चुके हैं. बुधवार को नामों की घोषणा के बाद, यह कमोबेश स्पष्ट है कि केंद्रीय मंत्रियों भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, मनसुख मंडाविया, नारायण राणे, पुरुषोत्तम रूपाला, वी मुरलीधरन और राजीव चंद्रशेखर को लोकसभा मार्ग से वापस संसद में जाना होगा – जब तक कि उन्हें संगठन की ओर नहीं ले जाया जाता.
वहीं जिन अन्य राज्यसभा सांसदों को पुनर्नामित नहीं किया गया है, उनमें भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी शामिल हैं.
अगस्त में राजग सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हर राज्यसभा सांसद को कम से कम एक चुनाव लड़ना चाहिए ताकि चुनावों का ‘अनुभव’ हो सके.
सूत्रों ने कहा कि मोदी का इरादा यह भी है कि लोकसभा चुनाव में जिन राज्यसभा सांसदों को उतारा जा रहा है, वे उन राज्यों में पार्टी के नए राजनीतिक चेहरों के रूप में उभर सकें- चाहे वह ओडिशा में प्रधान हों, केरल में मुरलीधरन हों; केरल या कर्नाटक में चंद्रशेखर; गुजरात में मंडाविया और रूपाला, और राजस्थान या हरियाणा में भूपेंद्र यादव.






