छत्तीसगढ़ में रफ्तार का कहर: तीन जिलों में सड़क हादसे, 2 की मौत, 10 से ज्यादा घायल

कोरबा। जिले के झाबू डैम में राखड़ (फ्लाई ऐश) प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “लो-लाइन एरिया” के नाम पर डैम से महज 30–40 मीटर के दायरे में ही ऊंचाई तक राखड़ भराव कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
ग्रामीणों और स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े पैमाने पर यह कार्य बिना अधिकारियों की जानकारी और सहमति के संभव नहीं है। इससे विभागीय भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में शंकर इंजीनियरिंग की कार्यप्रणाली भी विवादों में आ गई है। आरोप है कि राखड़ सप्लाई और प्रबंधन के नाम पर बड़े स्तर पर अनियमितता बरती गई, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ शासन को भी आर्थिक क्षति हुई है।
हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण विभाग अब तक चुप्पी साधे हुए है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि झाबू डैम में हुए राखड़ भराव कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, शंकर इंजीनियरिंग को दिए गए ठेकों की समीक्षा की जाए और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही 18 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों से करने की भी मांग की गई है।
एक संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो मामला मुख्यमंत्री स्तर तक उठाया जाएगा।
अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।






