छत्तीसगढ़

शराब-कोल केस:पूर्व मंत्री लखमा, अफसरों, पूर्व विधायकों सहित 106 पर केस

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) भी अब शराब और कोल घोटाले की जांच करेगी। ईडी के प्रतिवेदन के आधार पर एसीबी ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा और अमरजीत भगत के अलावा पूर्व विधायकों व आईएएस अफसरों समेत करीब 106 लोगों के खिलाफ पद के दुरुपयोग का केस दर्ज किया है। शराब घोटाले में ईडी करीब 71 और कोयला घोटाले में 35 के खिलाफ जांच कर रही है। ईडी की ओर से उन सभी के नाम प्रतिवेदन में भेजे गए हैं। उसी आधार पर एसीबी ने नामजद एफआईआर की है। पिछले साल मई में ईडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि इसमें अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और अफसर अनिल टुटेजा से 121.87 करोड़ की 119 अचल संपत्ति अटैच की गई।

अन्य लोगों को मिलाकर 180 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। ईडी की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि शराब घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़ी जांच रायपुर, भिलाई और मुंबई में की गई।इसमें नवा रायपुर में करीब 21.60 करोड़ की जमीन मिली है। इसके अलावा ईडी त्रिलोक सिंह ढिल्लो की 27.5 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट फ्रीज करने के अलावा 28 करोड़ रुपए के जेवर जब्त किए हैं। ईडी ने पुलिस अधिकारी अभिषेक माहेश्वरी, भोजराम पटेल, जेपी मौर्य, कुंजाम, पीयूष भाटिया नाम के लोगों की भी संलिप्तता की जांच को जरूरी बताया है।

इन पर दर्ज किया गया केस

विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, देवेंद्र यादव, पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह, गुलाब कमरो, शिशुपाल सोरी, चंद्रदेव प्रसाद राय, यूडी मिंज, निलंबित IAS समीर विश्नोई व रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया, सहायक खनिज अधिकारी संदीप कुमार नायक, खनिज अधिकारी शिवशंकर नाग, कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय, रौशन कुमार सिंह, निखिल चंद्राकर, राहुल सिंह, पारिख कुर्रे, मोइनुद्दीन कुरैशी, वीरेंद्र जायसवाल, रजनीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, जोगिंदर सिंह,नवनीत तिवारी, दीपेश टांक, राहुल मिश्रा, रामगोपाल अग्रवाल आदि पर केस दर्ज किया गया है।

समझें क्या है कोल और शराब स्कैम?

ईडी की जांच के अनुसार कोल और शराब का स्कैम करीब 2500 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, पूरा मामला जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच का है। इसमें कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, पूर्व मुख्यमंत्री के सचिवालय में पदस्थ अधिकारी सौम्या चौरसिया, आईएएस समीर बिश्नोई समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक 222 करोड़ की संपत्ति अटैच कर जांच की जा रही है। इसमें सबसे पहले पिछले साल मई में कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया था। बताया गया था कि साल 2019 से 2022 तक 2000 करोड़ का अवैध धन शराब से कमाया गया है।

ढेबर पर आरोप है कि उसने बड़ी रकम दुबई में अपने साथी विकास अग्रवाल के जरिए खपायी है। बड़ी रकम राजनीतिक लोगों को पहुंचायी गई है। इसके बाद इस केस में आबकारी विभाग के अधिकारी एपी त्रिपाठी, कारोबारी त्रिलोक ढिल्लन, नितेश पुरोहित, अरविंद सिंह को भी पकड़ गया था। इस केस में फिलहाल अनवर ढेबर जमानत पर हैं।

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