सामाजिक बुराई एवं महिलाएं नशा कर रही हैं पत्रकार ओ.पी. राठौर की कलम से

जांजगीर चांपा …समाज की पहचान उसकी संस्कृति और संस्कारों से होती है। लेकिन आजकल बदलते दौर में सामाजिक बुराइयाँ तेजी से पाँव पसार रही हैं। इनमें सबसे चिंताजनक है – नशे की लत। पहले यह समस्या प्रायः पुरुषों तक ही सीमित मानी जाती थी, किंतु अब महिलाएं भी नशे की गिरफ्त में आने लगी हैं।
नशे के कारण महिलाएं न केवल अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रही हैं, बल्कि परिवार की खुशहाल तस्वीर भी धुंधली हो रही है। घर की धुरी कहलाने वाली नारी यदि नशे की आदी हो जाए, तो बच्चों का भविष्य, परिवार का वातावरण और समाज की दिशा – सभी प्रभावित होते हैं। यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि सामूहिक सामाजिक संकट है।
नशे की गिरफ्त में आई महिलाएं समाज की उस गरिमा को ठेस पहुँचा रही हैं, जो उन्हें शक्ति, सहनशीलता और संस्कार की पहचान देती है। आवश्यकता है कि परिवार, समाज और शासन इस बुराई के खिलाफ मिलकर जागरूकता फैलाएँ।
नारी ही समाज की धुरी है। यदि वह नशे से दूर रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार को अपनाए, तो न केवल उसका जीवन, बल्कि पूरे समाज की दिशा सुधर सकती है।
मैने यह लेख तब लिखा जब एक स्वास्थ्य कर्मी महिला का वीडियो नशा करते देखा ।






