बम्हनीडीह में घोटाला: सरकारी जमीन पर नेताओं का कब्जा, अधिकारी मौन

सक्ती: बम्हनीडीह ब्लॉक में सरकारी जमीन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें स्थानीय नेताओं ने मिलकर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर व्यापारिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर लिया है। इस पूरे मामले में अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता ने प्रशासनिक तंत्र की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला बम्हनीडीह के शासकीय विश्राम गृह के सामने स्थित जमीन का है, जो मिशल रिकॉर्ड में घास भूमि के रूप में दर्ज थी। लेकिन नेताओं ने मिलकर इस जमीन पर कब्जा कर इसे अपने नाम करवा लिया और उस पर 16 दुकानों का एक कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया। यह पूरा खेल पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ, जिसमें कांग्रेस और भाजपा के नेताओं की संलिप्तता बताई जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि यह जमीन शासकीय विश्राम गृह के दीवार से सटी हुई है, और इसके बावजूद इस अवैध निर्माण पर किसी अधिकारी ने सवाल नहीं उठाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार के घोटाले में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आती है, क्योंकि बिना उनकी जानकारी और मिलीभगत के इतना बड़ा निर्माण कार्य संभव नहीं है।
अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता
हालांकि इस मामले को लेकर बम्हनीडीह तहसीलदार उमाकांत जायसवाल ने कहा है कि वह मामले की जांच करेंगे और यह पता लगाएंगे कि घास भूमि निजी लोगों के नाम कैसे चढ़ी। लेकिन इस बयान से क्षेत्रवासियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने अब तक इस अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया और नेताओं के दबाव में आकर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
हल्का पटवारी नंबर 3 बालकृष्ण पटेल ने बताया कि उक्त भूमि खसरा नंबर 177 में घास भूमि के रूप में दर्ज थी, लेकिन अब यह 9 लोगों के नाम चढ़ चुकी है। यह बात स्पष्ट करती है कि सरकारी जमीन पर नेताओं ने प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध रूप से कब्जा किया है, और अधिकारियों ने इस मामले को अनदेखा किया है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस अवैध कब्जे और निर्माण कार्य के खिलाफ जनता ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन का यह रवैया दिखाता है कि अधिकारियों में किसी भी पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं है। यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या वर्तमान सरकार इन नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पाएगी, या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह दबा दिया जाएगा?






