प्रयागराज महाकुंभ 2025: पहले दिन 1.65 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, अद्भुत खगोलीय संयोग में अमृत स्नान

प्रयागराज में महाकुंभ 2025 की शुरुआत ने आस्था और भक्ति के नए आयाम रच दिए। पहले ही दिन रिकॉर्ड 1 करोड़ 65 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में अमृत स्नान किया। यह दुर्लभ खगोलीय संयोग 144 साल बाद बना है, जिसे लेकर मान्यता है कि यह वही समय है जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश प्रकट हुआ था।
स्नान के लिए उमड़ा जनसैलाब
प्रयागराज के 44 घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला सुबह से ही उमड़ पड़ा। हर-हर गंगे के जयकारों और घंटा-घड़ियालों की ध्वनि ने पूरे माहौल को भक्ति से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि संगम में स्नान से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति होती है।
हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश
भक्तों का उत्साह और श्रद्धा बढ़ाने के लिए प्रशासन ने खास व्यवस्था की। संगम क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई, जिसने श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभव का एहसास कराया। स्नान के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, जहां NSG कमांडो और ड्रोन कैमरे निगरानी में लगे रहे।
दुर्लभ खगोलीय संयोग
महाकुंभ इस बार 144 साल बाद दुर्लभ खगोलीय संयोग में हो रहा है। पुराणों के अनुसार, यह वही समय है जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश का प्राकट्य हुआ था। इस संयोग को लेकर मान्यता है कि संगम में स्नान करने से अमृत के समान लाभ मिलता है।
सुरक्षा और व्यवस्थाएं
- NSG कमांडो और ड्रोन कैमरों की मदद से घाटों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
- संगम क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
- श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे जल और भंडारे की व्यवस्था की गई।
- घाटों पर मेडिकल टीमें और खोया-पाया केंद्र सक्रिय रहे।
आस्था और उत्सव का संगम
महाकुंभ में साधु-संतों और अखाड़ों की शोभायात्राओं ने आयोजन की भव्यता को बढ़ा दिया। नागा साधुओं का संगम में डुबकी लगाना और उनका आशीर्वाद लेना श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।






