जांजगीर-चांपा: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नए समीकरण, SC महिला आरक्षण से बदलेगा जिला पंचायत अध्यक्ष का चेहरा
जांजगीर-चांपा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के समीकरण अब पूरी तरह स्पष्ट होते नजर आ रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अनुसूचित जाति (SC) महिला आरक्षण के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां कई नेता इस आरक्षण के बाद दौड़ से बाहर हो गए हैं, वहीं कुछ के लिए यह सुनहरा अवसर बनकर आया है।
SC महिला आरक्षण से बदलेगी तस्वीर
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अब नारी शक्ति का दबदबा होगा। अकलतरा ब्लॉक के बम्हनी (निर्वाचन क्रमांक 10) और बलौदा ब्लॉक के चारपारा (निर्वाचन क्रमांक 12) को SC महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इससे यह साफ हो गया है कि इन क्षेत्रों से जीतने वाली महिला सदस्य को अध्यक्ष पद की ताजपोशी का मौका मिलेगा।
पार्टी रणनीतियों में बदलाव
SC महिला आरक्षण के बाद बीजेपी, कांग्रेस और बीएसपी ने अपने उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। पार्टियां अब पढ़ी-लिखी, युवा और जीतने वाली महिला चेहरों को मैदान में उतारने पर विचार कर रही हैं। बीजेपी राज्य में अपनी सरकार के दम पर इस चुनाव में बढ़त बनाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस को अपने तीन विधायकों के समर्थन का एडवांटेज मिलेगा।
इतिहास में महिलाओं का प्रभाव
पिछले चुनावी इतिहास को देखें तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अब तक पांच महिलाएं आसीन हो चुकी हैं। 2005 में पहली बार महिला अध्यक्ष के रूप में पूर्व सांसद कमला पाटले चुनी गई थीं। इसके बाद नंदनी राजवाड़े और सूरज ब्यास कश्यप जैसी महिला नेता इस पद को संभाल चुकी हैं। पिछले दो चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा, जहां नंदकिशोर हरवंश और यनिता यशवंत चंद्रा ने अध्यक्ष पद संभाला।
आरक्षण सूची और संभावित चेहरों की चर्चा
आरक्षण सूची के अनुसार, 17 निर्वाचन क्षेत्रों में से 6 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इनमें बम्हनी और चारपारा SC महिला के लिए आरक्षित हैं। इस आरक्षण के चलते इन क्षेत्रों में नारी शक्ति का नया नेतृत्व उभरने की संभावना है।
आकर्षण का केंद्र बनेगा चुनाव
राजनीतिक दलों की तैयारी और आरक्षण के नए समीकरणों के चलते यह त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव बेहद रोचक हो गया है। इस बार अध्यक्ष पद की दौड़ में कौनसी महिला जीत का परचम लहराएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
राजनीतिक प्रभाव और ग्रामीण विकास
ग्राम विकास की दिशा में इस चुनाव का महत्वपूर्ण प्रभाव होगा। जो भी महिला जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगी, उसे न केवल ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी निभानी होगी, बल्कि राजनीतिक दलों की उम्मीदों पर भी खरा उतरना होगा।






