जांजगीर-चांपा: फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी करने वाले आरोपी को कोर्ट ने सुनाई सजा

जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय ने फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी प्राप्त करने और साक्ष्य छुपाने के आरोपी को सजा सुनाई है। आरोपी रामकृष्ण राठौर को न्यायालय ने विभिन्न धाराओं में 3 से 3 साल सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा दी है।
फर्जी अंकसूची से नौकरी प्राप्त करने की कहानी
यह मामला 1984 का है, जब आरोपी रामकृष्ण राठौर ने आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल शक्ति (म.प्र. बोर्ड) की फर्जी अंकसूची का उपयोग कर मिनी माता हसदेव बागों परियोजना में एलडीसी (लोअर डिवीजन क्लर्क) के पद पर नौकरी प्राप्त की। इसके बाद वह जांजगीर चांपा और सक्ती में विभिन्न स्थानों पर कार्यरत रहा।
साक्ष्य छुपाने का प्रयास
2015 में जितेंद्र राठौर ने आरटीआई के तहत आरोपी के द्वारा विभाग में जमा की गई अंकसूची के बारे में जानकारी मांगी, जिसमें आरोपी की जन्मतिथि 05/08/1958 दर्ज थी। जब आरोपी को इस बारे में सूचना मिली, तो उसने विभाग में समस्त अंकसूची के खो जाने का दावा किया और शपथ पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उसने अपनी वास्तविक जन्मतिथि 05/08/1953 बताई। इसके बाद विभाग ने उसे 31 अगस्त 2015 को सेवानिवृत्त कर दिया।






