छत्तीसगढ़

लव मैरिज करने वाले दंपति को हाईकोर्ट की सुरक्षा: कोरबा एसपी को निर्देश, जीवन-स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करें

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लव मैरिज करने वाले एक नवदंपति को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कोरबा के एसपी को आदेशित किया है कि याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचे और उनके जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की विधिवत रक्षा की जाए।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविेंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि दंपति द्वारा कोई शिकायत की जाती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई कर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं। साथ ही संबंधित रिश्तेदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे दंपति के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करें।

मामले के अनुसार, कटघोरा निवासी चिंटू अग्रवाल और अंजलि शर्मा ने आपसी सहमति से 27 फरवरी 2026 को जयपुर स्थित आर्य समाज में विवाह किया और बाद में उसका विधिवत पंजीकरण भी कराया। दोनों बालिग होने के कारण उनका विवाह कानूनन वैध है।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि शादी के बाद उन्हें ऑनर किलिंग और झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकियां मिल रही हैं। पुलिस में शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उन्हें अपनी जान और स्वतंत्रता को लेकर लगातार भय बना हुआ है।

राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और किसी संज्ञेय अपराध का स्पष्ट आधार नहीं बनता। हालांकि, कोर्ट ने माना कि दो वयस्कों को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।

डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह समाज के हित में हैं और ऐसे दंपतियों को किसी भी प्रकार की धमकी या उत्पीड़न से सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है।

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