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छत्तीसगढ़ में गायों की दयनीय स्थिति: गौधाम योजना जमीनी हकीकत कब बनेगी?

ओपी राठौर …छत्तीसगढ़ में गायों की स्थिति दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होती जा रही है। सड़कों पर खुलेआम घूम रही गायें रोज़ाना सैकड़ों की संख्या में सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होकर अपनी जान गंवा रही हैं। गौवंश की लगातार हो रही मौतों से उनकी संख्या में कमी देखी जा रही है, लेकिन इस समस्या का कोई ठोस समाधान अभी तक नज़र नहीं आ रहा।

राज्य सरकार ने गौवंश संरक्षण के लिए गौधाम योजना लागू करने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य आवारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय देना और उनकी देखभाल सुनिश्चित करना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस योजना के परिणाम अभी तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। कई जगहों पर गौठान तो बने हैं, लेकिन वहां पर्याप्त संसाधन और व्यवस्था नहीं है। न तो सभी गायों को आश्रय मिल पा रहा है और न ही चारा-पानी की नियमित सुविधा उपलब्ध हो रही है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है। सड़क पर भटकती गायें वाहनों की चपेट में आकर असमय मौत का शिकार हो रही हैं। यह स्थिति न केवल पशु संरक्षण के लिए चुनौती है बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी हुई है।

लोगों का कहना है कि योजनाओं का असर तभी होगा, जब सरकार इसके क्रियान्वयन में तेजी लाए और जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए। सिर्फ घोषणा करने से स्थिति नहीं सुधरेगी। सवाल यह है कि आखिर कब तक मुहूर्त का इंतजार किया जाएगा और तब तक कितनी गायें सड़कों पर दम तोड़ देंगी?

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