भाजपा उपाध्यक्ष का विवादित वीडियो वायरल:पूर्व मंत्री चंद्राकर और भूपेंद्र सवन्नी की लड़ाई; ट्राेलर्स ने लगाए घोटाले के आरोप

छत्तीसगढ़ के भाजपा उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी अपने एक वीडियो की वजह से ट्रोल कर दिए गए। सोशल मीडिया यूजर्स ने साल 2021 का एक वीडियो पोस्ट कर सवन्नी को लेकर कई तरह के कमेंट साेशल मीडिया में किए हैं। ये कमेंट और ट्रोल उस वक्त किया जा रहा है, जब भूपेंद्र सवन्नी का नाम प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार बनाए जाने को लेकर चर्चा में है।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने भूपेंद्र सवन्नी और अजय चंद्राकर के बीच हुई लड़ाई का वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में अजय चंद्राकर और भूपेंद्र सवन्नी के बीच कहा-सुनी साफ सुनाई दे रही है। चंद्राकर कहते दिख रहे हैं- ‘जाओ जाकर चमचागिरी करो, मुझसे जरा ठीक से बिहेव किया करो, वरना मैं तुम्हें ठीक कर दूंगा।’
किसी जगह बिठाने लायक नहीं
ये वीडियो भाजपा की विचारधारा के समर्थक रायपुर के देवेंद्र गुप्ता ने पोस्ट किया है। उन्होंने पोस्ट पर लिखा- ऐसे लोग जो वरिष्ठों का सम्मान करना नहीं जानते वो कार्यकर्ताओं का क्या सम्मान करेंगे। ये शासन में किसी भी जगह बिठाने के लायक नहीं है। असल में भाजपा इनके लिए सेवा का माध्यम नहीं अपितु अपना उद्योग,भाई की मंडी संरक्षित करने का साधन मात्र है।
भाजपा में अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे कई निष्ठावान कार्यकर्ता मौजूद जो दशकों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं,विपरीत परिस्थितियों में भी भाजपा का झंडा बुलंद कर रहे हैं…मेरा मानना है उन पर भी तो मोहब्बत बरसनी चाहिए।

क्या हुआ था उस दिन
साल 2021 में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी रायपुर के भापजा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक ले रहे थे। तभी मंत्री अजय चंद्राकर और हाउसिंग बोर्ड के पूर्व प्रमुख और भाजपा नेता भूपेंद्र सवन्नी आपस में भिड़ गए।
इस दौरान चंद्राकर ने सवन्नी को काफी खरीखोटी सुना दी। चंद्राकर ने सवन्नी से कहा, ‘जाओ जाकर चमचागिरी करो, मुझसे जरा ठीक से बिहेव किया करो, वरना मैं तुम्हें ठीक कर दूंगा।’ बैठक के दौरान हुई यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शामिल होने के लिए सभी नेताओं को सूचना दी गई थी। लेकिन, पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से वे नाराज थे। बैठक में रायपुर के सभी नेताओं को बुलाया गया था। हालांकि, चंद्राकर की बात सुनकर सवन्नी ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। वे चुपचाप उनकी बात सुनते रहे। कुछ देर चली बैठक के बाद मामला शांत हो गया था।






