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अहो देवी गंगा, लहर तुरंगा… अफरीद में होगी भोजली प्रतियोगिता क्रमशः पुरस्कारों की होगी बौछार ..

अफरीद —छत्तीसगढ़ के ठेठ पारंपरिक पर्वों में भोजली महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भाद्र पक्ष के प्रथम दिवस में भोजली तालाबों में विसर्जित की जाती है। इससे पहले महिलाएं व कन्याएं भोजली की पूजा अर्चना कर अहो देवी गंगा, लहर तुरंगा की स्वर लहरिया के बीच विसर्जन के लिए ले जाती हैं। आठ दिन पहले भोजली लगाई जाती है। भोजली की सेवा करने के बाद रक्षा बंधन के दूसरे दिन इसे तालाब या नदियों में विसर्जन किया जाता है आपको बता दे बम्हनीडीह ब्लॉक के ग्राम अफरीद में रहस बेड़ा आदिवासी चौक में बीते अनेक वर्षों से भोजली प्रतियोगिता रखी जाती है जिसकी भोजली सेवा अच्छी रहती है उन्हें पुरस्कार दिया जाता है आयोजक सदस्य कुशाल भैना ने बताया आज शाम यह प्रतियोगिता सम्पन्न होगी जिसमें समस्त ग्रामवासियों को आमंत्रित किया गया है ।






