छत्तीसगढ़

माओवादी कमज़ोर पड़ रहे हैं — सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया, आत्मसमर्पण का दिया अल्टीमेटम

जगदलपुर, 7 नवंबर 2025। केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक देश से सशस्त्र माओवाद खत्म करने की जो डेडलाइन दी गई है, उसके मद्देनज़र माओवादी संगठन अपनी रणनीति बदलते और कमजोर होते दिख रहे हैं। हालिया पत्रों, प्रेस नोट और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों से स्पष्ट है कि संगठन की शीर्ष कमान झटकों से कंपी है और कई नेतागण या तो मारे गए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

शीर्ष बातें — संक्षेप में

सुरक्षा बलों का सख्त रुख

बस्तर में तैनात आईजी सुंदरराज पी. ने साफ कहा है कि अब शीर्ष माओवादी नेताओं के पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। आईजी ने कहा — जो माओवादी हिंसा छोड़कर आने की इच्छा रखते हैं, उनका स्वागत किया जाएगा और समाज में स्वीकार कर लिया जाएगा; वहीं जो हिंसा जारी रखेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान चलाकर शेष माओवादी काडर को निशाना बनाया जाएगा।

राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा के बस्तर दौरे के दौरान भी यही संदेश मिला कि सरकार शीर्ष माओवादी काडरों पर दबाव बढ़ा चुकी है और जल्द ही कुछ सुखद खबरें सामने आ सकती हैं — खासकर हिड़मा-संबंधी गतिविधियों के तारों पर।

संगठनात्मक कमजोरी और रणनीति में बदलाव

  • 2025 में हुए लगातार झटकों के कारण माओवादी संगठन की कमान और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कई उच्च कमांडर या तो मारे गए हैं या खुलेआम अलग रुख अपना रहे हैं।

  • कुछ स्टेट कमेटियों ने युद्धविराम बढ़ाकर समय निकाला है जबकि अन्य ने अंदरूनी मामलों को लेकर भिन्न बयान जारी किए हैं — यह संगठन के अंदर मतभेद व अस्थिरता का संकेत है।

  • स्थानीय स्तर पर आत्मसमर्पणों और पतन के कारण माओवादी प्रभाव कमजोर हुआ है, विशेषकर बस्तर-नारायणपुर के इलाकों में।

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