दर्जनों एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, गरीबों पर कार्रवाई से उठे सवाल नेशनल हाईवे 49 अफरीद सरकारी जमीन पर हो रही खेती केवल गरीबों पर डंडा – यह कैसा न्याय

अफरीद। बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम पंचायत अफरीद-मुड़पार में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई का सबसे अधिक असर गरीब और असहाय लोगों पर पड़ा है, जबकि वर्षों से बड़े पैमाने पर शासकीय भूमि पर कब्जा करने वाले प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अफरीद-मुड़पार क्षेत्र में दर्जनों एकड़ शासकीय भूमि पर कथित रूप से प्रभावशाली लोगों ने दुकानें, मकान और अन्य निर्माण कर रखे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा शासकीय भूमि का व्यावसायिक उपयोग भी किया जा रहा है, लेकिन उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। इतना ही नहीं नेशनल हाईवे में 49 में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज भूमि पर खेती की जा रही
वन विभाग ने हाल ही में बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बरसात के मौसम में उनके आशियाने उजड़ गए और वे बेघर हो गए। उनका सवाल है कि यदि कानून सभी के लिए समान है, तो फिर कार्रवाई भी बिना किसी भेदभाव के सभी अतिक्रमणकारियों पर होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे क्षेत्र का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और छोटे-बड़े, गरीब-अमीर अथवा प्रभावशाली व्यक्ति के बीच भेदभाव किए बिना शासकीय भूमि पर किए गए सभी अवैध कब्जों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई की जाए।
हालांकि, इस संबंध में वन विभाग या जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नेशनल हाईवे 49 सड़क के किनारे दर्जनों एकड़ सरकारी जमीन
हथनेवरा सारागांव के बीच छत्तीशगढ़ राजस्व रिकॉर्ड में दर्जनों एकड़ भूमि है जिस पर खेती की जा रही है यह भी कब्जे वर्षों पुरानी है जिस पर कब्जाबधारी दावा कर रहे है यह उनकी है और सरकार के पसीने भी इस जमीन पर पौधा रोपड़ करने छूट रही है और गरीब जो वर्षों से रह रहे उनके मकान में ताला लगाया जा रहा है





