छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में जन्मा ‘मरमेड बेबी’, सिर्फ 3 घंटे जीवित रहा नवजात

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में एक महिला ने ‘मरमेड सिंड्रोम’ से पीड़ित शिशु को जन्म दिया। नवजात के दोनों पैर आपस में जुड़े हुए थे और वह जलपरी की तरह दिखाई दे रहा था। हालांकि जन्म के करीब तीन घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, यह छत्तीसगढ़ का पहला और देश का पांचवां मामला है।

जानकारी के मुताबिक, 28 वर्षीय गर्भवती महिला को बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर्स ने जांच के बाद डिलीवरी का निर्णय लिया। जब शिशु का जन्म हुआ तो डॉक्टर्स भी हैरान रह गए। बच्चे के दोनों पैर जुड़े हुए थे और शरीर का निचला हिस्सा विकसित नहीं था।

केवल 800 ग्राम था वजन

डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्चे का ऊपरी हिस्सा (आंख, नाक, हृदय आदि) सामान्य था, लेकिन निचला हिस्सा पूरी तरह जुड़ा हुआ था। शिशु का वजन महज 800 ग्राम था। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सोनोग्राफी में इस तरह की विकृति का पता चल जाता है, लेकिन इस मामले में सीधे डिलीवरी के बाद जानकारी सामने आई।

धमतरी जिला अस्पताल के डॉ. राजेश सूर्यवंशी ने बताया कि जिला अस्पताल में एक बच्चे का जन्म हुआ, जिसमें कंजेनिटल और डेवलपमेंटल डिफेक्ट पाए गए। उसके बर्थ से एक लिम्ब नहीं था और जो दूसरा लिम्ब, वह थोड़ा पतला था। जो मछली की पूंछ की तरह दिखाई दे रहा था, लेकिन बच्चे की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि यह डिफेक्ट बहुत दुर्लभ होते हैं, लेकिन ऐसी संभावना कभी-कभार होती है।

क्यों होती है यह दुर्लभ विकृति?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति को ‘सिरेनोमेलिया’ या मरमेड सिंड्रोम कहते हैं। इसमें भ्रूण तक सही तरीके से रक्त नहीं पहुंच पाता या मां से बच्चे तक पोषण की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके अलावा कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव या पर्यावरणीय कारण भी इसकी वजह हो सकते हैं। इस विकृति में शिशु की किडनी, मूत्रमार्ग और जननांग जैसे जरूरी अंग विकसित नहीं हो पाते, जिसके कारण नवजात का जीवनकाल बेहद छोटा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विकृति लड़कों में लड़कियों की तुलना में करीब तीन गुना अधिक पाई जाती है।

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