CG Liquor News: शराब दुकानों में अब नहीं चलेगा कैश, 1 अक्टूबर से प्रीमियम शॉप पर सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट; ओवररेट रोकने आबकारी विभाग का बड़ा फैसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रीमियम शराब दुकानों पर निर्धारित MRP से अधिक कीमत यानी ओवररेट में शराब बेचने की शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए आबकारी विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश की सभी प्रीमियम शराब दुकानों को कैशलेस किया जाएगा। इस संबंध में आबकारी विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।
जारी आदेश के मुताबिक, अब प्रदेश की किसी भी प्रीमियम शराब दुकान पर ग्राहक कैश में भुगतान नहीं कर सकेंगे। शराब खरीदने के बाद भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से करना होगा।
1 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में लागू होगी व्यवस्था
आबकारी विभाग के अनुसार प्रीमियम शराब दुकानों में कैशलेस भुगतान की नई व्यवस्था 1 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी। इसके लिए सभी प्रीमियम शराब दुकानों पर QR कोड लगाए जाएंगे।
ग्राहक शराब खरीदने के बाद दुकान पर लगाए गए QR कोड को स्कैन कर ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे। इससे नकद लेन-देन को खत्म करने के साथ ही बिक्री और भुगतान का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
प्रदेश की 49 प्रीमियम दुकानों पर लागू होगा आदेश
यह कैशलेस व्यवस्था प्रदेश की 49 प्रीमियम शराब दुकानों के लिए जारी किए गए आदेश के तहत लागू होगी। विभाग का मानना है कि डिजिटल भुगतान शुरू होने से शराब की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और लेन-देन का रिकॉर्ड भी आसानी से जांचा जा सकेगा।
ओवररेट की शिकायतों पर लगेगी लगाम
प्रीमियम शराब दुकानों में MRP से ज्यादा कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ग्राहकों से बोतल पर निर्धारित कीमत से अधिक राशि लिए जाने को लेकर आबकारी विभाग के सामने शिकायतें पहुंचती रही हैं।
विभाग का मानना है कि कैशलेस व्यवस्था से ओवररेट की शिकायतों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। ऑनलाइन भुगतान होने से ग्राहक द्वारा किए गए भुगतान और शराब की बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे अनियमितता की स्थिति में जांच करना आसान होगा।
शराब खरीदने से पहले MRP जरूर जांचें
नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी ग्राहकों के लिए जरूरी है कि शराब खरीदते समय बोतल पर दर्ज MRP जरूर जांचें। निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगे जाने पर ग्राहक संबंधित विभाग में शिकायत कर सकते हैं।
आबकारी विभाग की नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रीमियम शराब दुकानों में ओवररेट पर रोक, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।






