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अपनी योग्यता और परिश्रम के बल पर डिप्टी कलेक्टर बने अभिषेक सिंह राठौर, जानिए छत्तीसगढ़ के इस होनहार युवा की प्रेरणादायक कहानी*

*अफरीद*। यह कहानी उस होनहार बालक की है, जिसने बचपन से ही बड़े सपने देखे और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्हें साकार कर दिखाया। हम बात कर रहे हैं ग्राम अफरीद के गौरव, अभिषेक सिंह राठौर की, जो अपनी प्रतिभा, दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक परिश्रम के दम पर आज डिप्टी कलेक्टर, कोरबा के पद तक पहुंचे हैं।
अभिषेक सिंह राठौर, स्वर्गीय हरपाल सिंह राठौर के सुपुत्र हैं। बचपन से ही वे मेधावी, मृदुभाषी और अनुशासित रहे। उनकी सोच अन्य बच्चों से अलग थी और वे शुरू से ही जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना संजोए हुए थे।
अभिषेक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, अफरीद से प्राप्त की कक्षा पांचवीं तक वे विद्यालय के अग्रणी विद्यार्थियों में शामिल रहे। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें उनका चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ हुआ। हालांकि गांव, विद्यालय और बचपन के मित्रों को छोड़ने का मन नहीं था, फिर भी आंखों में आंसू लिए उन्होंने नई शिक्षा यात्रा की शुरुआत की।
उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, मल्हार से बारहवीं तक की शिक्षा प्राप्त की। छुट्टियों में वे अपने गांव अफरीद लौटते रहे और पुराने दोस्तों के साथ कंचे खेलना, क्रिकेट खेलना, पत्थर कोड़हिल खेलना और पतंग उड़ाने जैसे बाल सुलभ मनोरंजनों का आनंद लेते रहे। गांव और मित्रों से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहा।
बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अभिषेक ने मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास किया और बिलासपुर में मेडिकल की तैयारी शुरू की। इसी दौरान उनके जीवन में सबसे बड़ा दुख आया, जब उनके पिता स्व. हरपाल सिंह राठौर का आकस्मिक निधन हो गया। पिता के निधन से अभिषेक पूरी तरह टूट गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।
इस कठिन दौर में उन्होंने गांव में अपने पिता के सहयोग से संचालित ज्ञानोदय शिशु मंदिर में लगभग छह माह तक बच्चों को शिक्षा दी। साथ ही गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूर साइकिल चलाकर टाइपिंग सीखने जाते रहे। उन्होंने अपने चाचा रामेश्वर सिंह राठौर के किराना व्यवसाय में भी सहयोग किया तथा प्रतिदिन सुबह 6 से 8 बजे तक बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को भौतिकी और रसायन शास्त्र की ट्यूशन पढ़ाई।
पिता के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति के तहत अभिषेक की नियुक्ति कलेक्टर कार्यालय, जांजगीर-चांपा में बाबू के पद पर हुई। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। अपनी प्रतिभा के बल पर उन्होंने शिक्षाकर्मी भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की तथा पुलिस विभाग में उप निरीक्षक (एसआई) पद के लिए भी चयनित हुए। लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में उच्च पद प्राप्त करना था, इसलिए उन्होंने निरंतर प्रयास जारी रखा।
इस दौरान उन्होंने अपने छोटे भाई और बहन का मार्गदर्शन भी किया। उनके संघर्षपूर्ण सफर में चाचा रामेश्वर सिंह राठौर का विशेष सहयोग रहा।
कलेक्ट्रेट की नौकरी करते हुए अभिषेक ने विभागीय परीक्षाओं की तैयारी की और अपनी मेहनत के बल पर नायब तहसीलदार पद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने निरंतर आगे बढ़ते हुए आज डिप्टी कलेक्टर, कोरबा के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।
इस उपलब्धि के बाद अभिषेक भावुक हो उठे। उन्होंने अपने गांव अफरीद, बचपन के मित्रों और उन सभी लोगों को याद किया, जिन्होंने संघर्ष के दिनों में उनका साथ दिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, गुरुजनों, मित्रों और शुभचिंतकों को दिया।
अभिषेक सिंह राठौर की यह यात्रा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखा जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
आज अभिषेक सिंह राठौर केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे ग्राम अफरीद, क्षेत्र और समाज के लिए गौरव का विषय हैं।

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