बिलासपुर नगर निगम की हालत खस्ता:450 ठेका मजदूरों को दिसंबर से नहीं मिला वेतन, बिजली बिल का 80 करोड़ बाकी

बिलासपुर नगर निगम की माली हालत खस्ता हो गई है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निगम के अंतर्गत ठेके पर काम कर रहे 450 कर्मचारियों को महीनों से तनख्वाह नहीं मिल रही है। बिजली बिल की बात करें, तो नगर निगम पर 80 करोड़ रुपए का बकाया है।
निगम की समीक्षा बैठक में निकायों को बार-बार आत्मनिर्भर होने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं निकल रहा है। नगर निगम की ओर से आय बढ़ाने के लिए जिस अनुपात में योजनाएं चलाई जानी चाहिए, वह नगर निगम की बजाय दीगर संस्थाएं कर रही हैं, जिससे नगर निगम को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कॉम्प्लेक्स बनाएं, हालत सुधर जाएगी- महापौर
महापौर रामशरण यादव का दो टूक कहना है कि निगम प्रशासन आय बढ़ाने के लिए अपनी संपत्ति का दोहन करे। इसके लिए कॉम्प्लेक्स बनाया जा सकता है। निगम ऐसा पहले भी कर चुका है। इससे निगम को प्रीमियम के साथ किराए के रूप में स्थायी तौर पर आमदनी का जरिया मिल जाएगा। राजीव प्लाजा इसका उदाहरण है।
महापौर ने इस बात पर एतराज किया कि जो काम नगर निगम को करना चाहिए, वह स्मार्ट सिटी कर रही है। उन्होंने कहा कि कोतवाली इलाके में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण अगर स्मार्ट सिटी की जगह निगम करता, तो उसे आमदनी का स्थायी स्रोत मिल जाता। उन्होंने कहा कि टैक्स वसूल नहीं पा रही स्पैरोटेक कंपनी को तत्काल बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।
वसूली का प्रतिशत ठेकेदार की तुलना में निगम के राजस्व कर्मियों का अधिक है। निगमकर्मी जिम्मेदारी से अपना काम कर रहे हैं। ठेका निरस्त करने के लिए एमआईसी और सामान्य सभा में कई बार प्रस्ताव लाया जा चुका है, लेकिन पता नहीं क्यों प्रशासन इसका क्रियान्वयन नहीं कर रहा है।






