छत्तीसगढ़

सरकारी शराब दुकान पर फिर उठे सवाल, ओवररेटिंग और अव्यवस्था के आरोप

खैरागढ़ की सरकारी शराब दुकान एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। पहले मिलावटी शराब और फर्जी होलोग्राम के मामलों को लेकर चर्चा में रही यह दुकान अब कथित ओवररेटिंग, अव्यवस्था और दबंगई जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब खरीदने के लिए ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं।

आरोप है कि दुकान के बाहर कुछ कथित असामाजिक तत्वों ने अपना अनौपचारिक नेटवर्क बना रखा है। ग्राहकों का कहना है कि यदि जल्दी शराब चाहिए तो बोतल पर तय कीमत से करीब 10 रुपए अधिक देने पड़ते हैं। विरोध करने पर गाली-गलौज, धमकी और अभद्र व्यवहार तक किया जाता है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा खेल सरकारी दुकान के आसपास खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई सख्ती दिखाई नहीं दे रही। शाम होते ही दुकान के बाहर लंबी कतारें, धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति बन जाती है। नागरिकों का कहना है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था लगभग नदारद है और भीड़ नियंत्रण के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।

लोगों का आरोप है कि इसी अव्यवस्था के कारण आए दिन विवाद, मारपीट, जेबकट्टी और चाकूबाजी जैसी घटनाओं की चर्चाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पहले से विवादों में रही इस दुकान की निगरानी आबकारी विभाग ने क्यों नहीं बढ़ाई।

मामले को लेकर जब चंद्र प्रकाश सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अब मामला सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भरोसे का सवाल बन गया है। लोगों की मांग है कि शराब दुकान में सुरक्षा, पारदर्शिता और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

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