हर मौसम में खिलेंगे फूल, बढ़ेगी आमदनी : कृषि छात्र वैभव सिंह राठौर की खास रिपोर्ट

रायपुर। क्या आप जानते हैं कि हर मौसम में फूलों की नर्सरी से निरंतर और अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है? जांजगीर जिले के कृषि छात्र वैभव सिंह राठौर इसी विषय पर फुलवारी बगीचों का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सही योजना और मौसमी विविधता अपनाई जाए, तो फूलों की नर्सरी किसानों के लिए सालभर आय का मजबूत साधन बन सकती है।
इसी उद्देश्य से वैभव सिंह राठौर ने दुर्ग जिले के भानपुरी (कोकड़ी, अंडा) में एक सफल नर्सरी का फील्ड अवलोकन किया। यहां 35-40 वर्षों से पौध उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय अनुभवी नर्सरी संचालक राजकेश्वर प्रसाद ने अपनी मेहनत और अनुभव से एक साधारण खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है।
छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय धनौरा, दुर्ग के अंतिम वर्ष के छात्र वैभव ने कृषि पत्रकारिता एवं व्यवहार कौशल विषय के अंतर्गत जब श्री प्रसाद से मुलाकात की, तो उनकी कार्यप्रणाली और अनुभव से काफी प्रभावित हुए। वर्तमान में श्री प्रसाद 1.35 एकड़ क्षेत्र में नर्सरी संचालित कर रहे हैं, जिसमें आधे से अधिक हिस्से में व्यवस्थित रूप से पौध उत्पादन किया जाता है।
इस नर्सरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पूरे वर्ष अलग-अलग मौसम के अनुसार पौधों का उत्पादन किया जाता है, जिससे आय का सिलसिला लगातार बना रहता है। सर्दियों में डहलिया, मैरीगोल्ड, पैंसी और पेटूनिया जैसे आकर्षक फूल तैयार किए जाते हैं। वहीं वर्षा ऋतु में फलदार और इनडोर पौधों का उत्पादन होता है, जबकि गर्मी के मौसम में सूरजमुखी, जीनिया, मोगरा और कॉसमॉस जैसे पौधे उगाए जाते हैं।
इस कार्य में उनके पुत्र योगेश कुमार प्रसाद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो स्वयं बीएससी एग्रीकल्चर के छात्र हैं और पढ़ाई के साथ-साथ नर्सरी प्रबंधन में भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
वैभव सिंह राठौर का यह फील्ड अवलोकन दर्शाता है कि सीमित जमीन में भी वैज्ञानिक पद्धति और मौसमी योजना के साथ नर्सरी व्यवसाय को सफल और लाभकारी बनाया जा सकता है। राजकेश्वर प्रसाद की यह कहानी न केवल किसानों बल्कि कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।






