छत्तीसगढ़

CGMSC को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाईकोर्ट के मुआवजा आदेश और प्रतिकूल टिप्पणियों पर लगी रोक

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) को निविदा विवाद मामले में Supreme Court of India से अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने High Court of Chhattisgarh के 5 फरवरी 2026 के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 तय की है।

सुनवाई के दौरान CGMSC की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा CGMSC पर लगाए गए एक लाख रुपये के मुआवजे (Compensation) के भुगतान और आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों (Adverse Observations) पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।

बताया गया कि यह विशेष अनुमति याचिका CGMSC के अध्यक्ष दीपक म्हास्के और प्रबंध संचालक ऋतेश कुमार अग्रवाल (IAS) के मार्गदर्शन में दायर की गई थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला CGMSC की एक निविदा प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप था कि निगम ने कम दर वाले पात्र बोलीदाता की बजाय अधिक दर वाले ठेकेदार को टेंडर आवंटित कर दिया था। इस मामले में High Court of Chhattisgarh की डिवीजन बेंच, जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रमेश चंद्र सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र अग्रवाल शामिल थे, ने CGMSC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया था।

यह याचिका रायगढ़ जिले के घरघोड़ा निवासी नटवर लाल अग्रवाल, जो बी-श्रेणी के पंजीकृत सिविल ठेकेदार हैं, ने अपने अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा के माध्यम से दायर की थी। याचिका में उनकी बोली को अयोग्य घोषित करने तथा 23 सितंबर 2025 को अनुबंध दूसरे ठेकेदार को देने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम राहत दिए जाने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

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