छत्तीसगढ़

जीरो बैलेंस वाली उम्मीदवार की कहानी:छत्तीसगढ़ की सबसे गरीब प्रत्याशी शांति, घर वाले भी नहीं जानते कि लड़ रही हैं चुनाव

छत्तीसगढ़ में लोकसभा का चुनाव लड़ने वाली एक ऐसी भी महिला है जिसके खाते में बैलेंस जीरो है। प्रदेश की सबसे गरीब प्रत्याशी करोड़पति नेताओं के सामने चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। बैगा आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली शांति बाई मरावी कोरबा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं।

शांति का चुनाव लड़ना उनके परिवार के लोगों के लिए भी हैरानी से भरा है। आलम यह है कि शांति के बहन और परिजन यह भी नहीं जानते कि वह चुनाव लड़ रही हैं। आखिर क्यों एक गरीब आदिवासी महिला उतर आई, चुनावी रण में यह जानने के टीम शांति भाई मरावी के गांव पहुंची।

छोटी सी पहाड़ी पर टूटी फूटी सड़क शांतिबाई के गांव में है
छोटी सी पहाड़ी पर टूटी फूटी सड़क शांतिबाई के गांव में है

मध्यप्रदेश बॉर्डर से लगा छोटा सा गांव है बेदरापानी

बेदरापानी… यह शांति बाई मरावी के गांव का नाम है। कोरबा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला यह गांव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला में स्थित है। गांव के पीछे बनी पहाड़ी के पीछे मध्य प्रदेश है। शांतिबाई मरावी अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ के इस आखिरी गांव में रहती है।

शांति बाई का गांव बेहद अंदरूनी इलाके में होने के कारण यहां पहुंचना मुश्किल है। वहीं पहाड़ी पर बसे होने और गांव की खराब सड़क होना मुसीबत और बढ़ा देती है। यह इलाका बैगा आदिवासियों का है। जब दैनिक भास्कर की टीम शांतिबाई मरावी के घर का पता पूछते-पूछते आगे बढ़ रही थी तो हर ग्रामीण यह देखने और जानने की कोशिश कर रहा था कि आखिर मामला क्या है।

शांति बाई के ससुर ज्ञानुलाल बैग और बहन सोन बाई को पता नहीं कि वह चुनाव लड़ रही हैं

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