नगर पंचायत बना बम्हनीडीह, मगर गलियों में अब भी अंधेरा! कई खम्भों की लाइट खराब, कई जगह रोशनी का इंतजाम ही नहीं—आखिर कब मिलेगी नगरवासियों को अंधेरे से निजात


बम्हनीडीह/रामकिशन जायसवाल /नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद बम्हनीडीह के विकास को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन नगर के कई गली-मोहल्लों में रात होते ही अंधेरा पसरा नजर आता है। जगह-जगह लगे विद्युत खम्भों की लाइटें खराब पड़ी हैं, तो कई खम्भे ऐसे भी हैं जहां अब तक प्रकाश व्यवस्था का इंतजाम ही नहीं किया गया है।
नगर पंचायत बनने के बावजूद यदि नागरिकों को रात के समय अंधेरी गलियों से गुजरना पड़े, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर नगर के खम्भों पर रोशनी कब जलेगी और लोगों को अंधेरे से कब निजात मिलेगी?
स्थानीय नेताओं द्वारा नगर के विकास के लिए अपने स्तर पर प्रयास किए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई मोहल्ले पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के इंतजार में हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार और नई लाइट लगाने के लिए नगर पंचायत स्तर पर कोई ठोस कार्ययोजना बनाई गई है?
सबसे बड़ा सवाल सरकारी रिकॉर्ड को लेकर भी है। कहीं ऐसा तो नहीं कि कागजों में खम्भों पर लाइटें लग चुकी हों और जमीन पर अंधेरा कायम हो? या फिर कई स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था के लिए अब तक कोई काम ही नहीं किया गया? इसकी वास्तविकता नगर पंचायत के संबंधित रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान करने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल बम्हनीडीह के अनेक वार्डों और मोहल्लों में रात का अंधेरा नगर पंचायत की विकास व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है। नगरवासियों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि खम्भों पर रोशनी चाहिए।
सवाल सीधा है—लाइट कब जलेगी?
नगर पंचायत प्रशासन कब खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करेगा और जिन खम्भों पर लाइट नहीं लगी है, वहां प्रकाश व्यवस्था कब सुनिश्चित होगी? यह सवाल अब नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है।





